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INCEPTION फिल्म स्वप्न पर आधारित - वर्तमान में कैसे प्रासंगिक है

Posted On: 14 Feb, 2016 में

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INCEPTION, का अर्थ होता है सूत्रपात आरम्भ
वैसे ये हॉलीवुड की फिल्म का नाम भी है जिसमे मुख्य किरदार लियोनार्डो कैप्रियो का है और कुछ दिनों पहिले मैंने देखा भी है
यह फिल्म सपनो में व्यक्ति क्या करता है करसकता है कोई अन्य अपरिचित किरदार उससे क्या करवा सकता है के बारे मे है वैसे इस स्टोरी प्लाट के आईडिया पर टॉम क्रूज की दो फिल्मे है ऐज ऑफ़ टुमारो और ओबिलिओन और निकोलस क्रेग की लेफ्ट बिहाइंड भी है
लेकिन सही मायनो में इंसेप्शन सही और ओरिजिनल आईडिया की स्टोरी मालूम पड़ती है और सपनो में होने वाली घटनाओ उनमे अपरिचित किरदारों के साथ व्यक्ति क्या करता है क्या वे करवाते है सभी का बखूबी चित्रण किया है
कुछ बातें जैसे सपने में जो चोट लगती है तो दर्द ठीक वैसा ही होता है जैसे जगे रहने पे होता है कोई सपने में अगर मर गया तो उसकी स्थिति कोमा में गए जैसी होनी निश्चित है व्यक्ति की पुरानी यादें सपने में किस तरह परेसान कर सकती है इसका भी चित्रण व् व्याख्या है सपने मस्तिष्क अपने विचार बदल सकता है या साथ के अपरिचित किरदार विचार बदलवा सकते है वे आपके दिमाग पे कब्जा कर के व्यक्ति के विचार चुरा सकते है या विचार बदलने को प्रेरित कर सकते है
कुछ इस तरह से प्रभावित करना की बाद में सपने से जागने के बाद उन सपने के हिसाब से अपने जीवन में परिवर्तन कर सकता है या निर्णय बदल सकता है या बदल लेते है लोग,
नायक फिल्म में एक आर्किटेक भी रखता है जो सपने के लिए प्लाट भवन बिल्डिंग टूरिस्ट प्लेस होटल हॉस्पिटल भी बनता है
साथ में एक खास बात फिल्म में बताया गया है की सपने से जागने के लिए शॉक या झटका बहुत ही जरुरी होता है नहीं तो सपने से कोई जागेगा नहीं मतलब अन्नंत स्वप्न जगत में खो जायेगा अर्थात उस स्टेज को कोमा में चले जाना कहते है सो झटका सपने से जागने के लिए बेहद जरुरी है

Inception-3

फिल्म की दो मुख्य बातें पहले की नायक कहता है कैसे मालूम होगा की हम वास्तविक जीवन में है या सपने में तो इस्सके लिए एक गैजेट सभी को रखना होता है को छोटा सा कोई भी वस्तु जो मुट्ठी में आजाये ताकि सपने से जागने के बाद चेक कर सके, अमूमन ऐसा सभी के साथ होता है की सपने टूटने के बाद नींद खुलने पर व्यक्ति अपने शरीर की कोई विशेष वस्तु या आसपास की चीजें टटोल के देखता है
दुशरे नायक कहता है की व्यक्ति के मस्तिष्क में अपना आईडिया या विचार डालना ताकि वह आपके हिसाब से काम कर सके और उसका अपने मतलब सिद्ध करने के लिए इस्तेमाल कर सके,
विचार एक वाइरस की तरह होते है वो आपको बना भी सकते है और ख़त्म भी कर सकते है
तब मूल बात यह है की यहाँ भारत में दिल्ली या अन्य कई राज्यों की कुछ प्रमुख शिक्षा केन्द्रों समुदायों, जातियों, वर्गों में देश विभाजक आईडिया विचार नए आये छात्रों, नवयुवको या फिर भोले भाले लोगो के मस्तिष्क में डाले जा रहे है वो भी खुली आँखों से उसके लिए दिवास्वप्न नाम दिया जाता है
ये खतरनाक विचार जो खुली आँखों से उन अपरिपक्व अनमैच्योर्ड युवको के मस्तिस्क में ठूंसे जा रहे है उसके लिए आर्किटेक मने समाज शास्त्रियों, इतिहासकारो, साम्यवादी प्रवक्ताओं द्वारा मनगढंत तथ्य से व् ढंग से, विद्रोही भाव युक्त तरीके के आधार या प्लाट चक्रव्यूह तैयार किये जाते है फिर उन आधारो को हरसम्भव करके सत्य के निकट या सत्य सिद्ध करने की होती है फिर उन तोड़ मरोड़ के प्रस्तुत किये गए विचारो का नायक या शिक्षाविद, बुद्धिजीवी नेता द्वारा ऐसे सब्जबाग दिखाए जाते है विचार भरे जाते है की बाद में जब वे युवक सोते है उन्हें उन लोगो द्वारा सुने गए विचारो का उनका मस्तिष्क रात को सोते समय उस हिसाब से उन्हें किसी राज सिंहासन पे बैठा पता है।
और सुबह होते ही उस सपने वाली दुनियां को पाने के लिए खुद के देश से लड़ने को तैयार हो जाता है उसके कृत्य होने वाले दुष्परिणामों की चिंता नहीं होती देश समाज की होने वाली हानि की भी चिंता नहीं होती है वो एक अलग ही नशे में होता है
लेकिन उसके मन मस्तिस्क में विभाजक या द्रोही विचार भरने वाले लोग उस गैजेट के बारे में नहीं बताते जो हाथों की मुट्ठी में बंद होने लायक होती है जिससे वे पहचान सके की फानी दुनिया और असलियत की दुनिया का अंतर कैसा होता है
नवयुवको के मस्तिष्क में डाले जाने वाले विचारो में सबसे प्रमुख होता है की हक़ छिना गया है , अनन्याय हुआ तुम्हारे साथ………
हद हो गयी इतने बड़े विद्यालय में पढ़ने आये सुविधाओं की भरमार है सरकार पैसा दे रही सब्सिडी दे रही है फिर भी अन्याय ही बताया जाता है
मतलब साफ़ हो जाता है की तुम्हे पढ़ना नहीं है न हीं हमे पढ़ाना है चलो विचारो के थोपने की नेतागीरी करनी है
देश में बहुत से ऐसे लोग जो की अभाओं में आपने आरम्भिक जीवन को व्यतीत करते हुए संघर्ष करते हुए आज बहुत ही ऊँचे मुकाम पे है ऎसे लोग हर वर्ग से आते है व्यापार, राजनीती, प्रशासनिक सेवा विज्ञानं शिक्षा, खेल आदि जगहों पे बहुत से बड़े बड़े नाम है जो कभी माध्यम वर्गीय या गरीब परिवारो से आये है लेकिन उन लोगो ने कभी देश विभाजक बाते नहीं करी होगी। नहीं तो आज जिसके पास सबसे ज्यादा दौलत होती ताकत होती वो देश शासक होता।
इंसेप्शन – सूत्रपात देशद्रोही देशविभाजक गतिविधियों का हो चुका है इस देशविभाजक स्वप्न से जगाने के लिए झटके देने अति आवश्यक हो गए है …
हाँ तो याद रखियेगा झटके या शॉक से सपने से जागें तो सबसे पहले आपके पास वो गैजेट जरूर हो जिससे आप सच और वास्तविक दुनिया के बारे में जान सके, अंतर समझ सकें तभी अपने कदम उस सही और मनचाहे ओर मोडे। जिससे देश और समाज की कोई क्षति न हो।

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Avdhut के द्वारा
February 15, 2016

प्रवीण जी क्या मनोरंजक ढंग से लिखते है पहले एकबारगी तो लगा कि फिल्म की समीक्षा है लेकिन कहाँ की बात कहाँ लाके सिद्ध कर देते है वास्तव में देश के नादान जनता को कुछ लोगो द्वारा किसी तरह बरगलाने के का प्रयास तो हो ही रहा है हम तो पढ़ने वाले लोग में से है इतना बड़ा लिख नहीं सकते वैसे आपके लेख में निरंतरता नहीं है फिर भी आकर्षक ढंग से अपनी बात रखने की विधि आपने बताया धन्यवाद.

Dileep Patel के द्वारा
February 15, 2016

प्रवीन भाई बहुत ही सही समय पर आपका ब्लॉग आया और यह लाइन ” देशविभाजक स्वप्न से जगाने के लिए झटके देने अति आवश्यक हो गए है” हाँ तो देश द्रोहियो को भयंकर झटके ही दिया जायेगा सरकार प्रसासन न करेगा तो जनता झटके देगी सनद रहे

pravin kumar के द्वारा
April 15, 2016

धन्यवाद अवधूत जी हो सकता है कि आपको लेख में निरंतरता नहीं लगती हो किन्तु विषय ही ऐसा है की अलग अलग पेराग्राफ में तथ्य रखने पड़े है

pravin kumar के द्वारा
April 15, 2016

धन्यवाद पटेल जी


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