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लंदन हैज फालेन और लंदन के मेयर सादिक खान

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लंदन हैज फालेन
यह एक हॉलीबुड की फिल्म का नाम है जो लन्दन मेयोरेल चुनाव के पहले प्रदर्शित हुई थी वैसे बात लंदन की है
और उसमें मोदी लहर की
क्या मोदी लहर खत्म हो रही है
लंदन के मेयर चुनावों का मोदी से क्या संबंध ?
वो ऐसे कि मोदी के भारतीय केंद्रीय राजनीति में उदय से दुनिया भर की वे राजनीतिक मान्यता ध्वस्त हो गयी जिसमें कि किसी भी देश का प्रमुख या शीर्ष सत्ता पर एक निहायत गरीब परिवार का व्यक्ति नहीं पहुंच सकता या बैठ सकता है जिसके पूर्वजों की कभी कोई और खुद उसकी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि न रही हो फिर भी
एक सामान्य परिवार का व्यक्ति जिसकी कोई उच्च शिक्षा दीक्षा किसी देशी विदेशी नामी विश्वविद्यालय में न हुआ हो तब भी
वो कोई बहुत दौलतमंद न हो तब भी।
मोदी का उदय दुनिया भर के राजनीतिक दलों केलिए आफत ही जैसे है मठाधीस जागीरदार टाइप के नेताओं के अवसान काल अरम्भ हो गया है
संसार के हर मुल्क के नागरिकों के लिए उन्होंने ने एक नयी उमंग भर दी है आम पब्लिक की राजनीतिक महत्वाकांक्षा जगा दी है कि कोई भी आम इंसान देश के सत्ता के शीर्ष पर पहुँच सकता है,
और मोदी के मुख्यमंत्रीत्व काल में योरपीयन अमेरिकी देशों का मोदी विरोध का संभवतः एक कारण यह भी था की यह आम नागरिकों मे राजनीतिक महत्वाकांक्षा ना जगा दे यह व्यक्ति, उनके विदेशी यात्राओं के कवरेज और विदेशी जनता मे मोदी क्रेज देख यही लगता है
अब मोदी लहर का विदेशी कनेक्शन
सबसे पहले यह जानिए की जब भी मोदी किसी विदेशी दौरे पर जाते हैं तो वहाँ की आम जनता यह देखने को आती है भारतीयों ने चाय बेचने वाले गरीब परिवार के इंसान को प्रधानमंत्री चुना है वो कैसा हो सकता है
अमूमन हर व्यक्ति सामान्य पब्लिक, लोग मोदी में स्वयं को देखते हैं
सो मोदी लहार का शोर क्यों है क्योंकि मोदी ने दुनिया के दो बड़े देशों एक पूरब दूसरा पश्चिम मे स्टार प्रचारक बन गये थे और वहाँ के राजनीतिक गणित को ही फेल कर दिया।
एक जापान दूसरा ब्रिटेन
दोनो देशों के राजनीतिक दलों ने मोदी को निमंत्रण दे कर अपने देश मे बुलाया और हर कार्यक्रम में एयरपोर्ट पर उतरने से ले कर तक साथ रहते हैं और तो और
अबकी बार मोदी सरकार
जैसे मिलते जुलते नारे भी खुद के उम्मीदवार के लिए गढ़ लेते हैं और दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को दोबारा चुन लिया जाता है वो भी प्रचंड बहुमत से वहाँ की जनता द्वारा
क्योंकि इन देशों की जनता को लगता है कि हमारे नेता के अंदर एक आम इंसान के प्रति सम्मान है।
अब लंदन मेयर चुनाव, मोदी लहर,जैक गोल्डस्मिथ, सादिक खान,
गोल्डस्मिथ और खान लंदन मेयर के चुनाव में कंजरवेटीव और लेबर पार्टियों से उम्मीदवार हैं
हैसियत
गोल्डस्मिथ
माने सोने का कारोबारी होता है जोकि वास्तव में यह परिवार है पुराने लार्डस रहे है अथाह दौलत के मालिकों मे से एक है ये परिवार, ब्रिटेन मे किसी की भी सरकार हो इस परिवार का एक पांव खुद उनके घरों मे तो दूसरा बकीघंम पैलेस व डाउनिंग स्ट्रीट मे होता है मेयर तो जब चाहे इस परिवार के लोग बन जाते है माने टोटल राजनीतिक हैसियत में भारत के गाँधी परिवार या यादव परिवार से तनिक भी कम नहीं
सादिक खान
एक मामूली से बस ड्राइवर का लौंडा जो पाकिस्तानी हिस्से के सिंध बलोच प्रवासी और पार्टी का कार्यकर्ता व् सांसद बस
चुनाव प्रचार शुरू
भारतीय राजनीतिज्ञों और चुनावों के तरह देखीये-
गोल्डस्मिथ के तरफ से आरोप
सादिक के संबन्ध आतंकी संगठनों से है
सादिक कातिल हत्यारा है
सादिक लंदन बम कांड में सहयोगी है
सादिक मूर्ख है
सादिक कभी गुलाम रहे एशियाई देश का है
सादिक खान और पार्टी प्रमुख सबका विरोध करते है और सभी आरोपों को निराधार बताते है वैसे सादिक खान ने कुछ आतंकियों के मुकदद्मे केश लड़े है हालाँकि सादिक के खिलाफ फतवे भी जरी हुए है
फिर टर्निगं प्वाइंट आरोप गोल्डस्मिथ के और से लंदन संभालाना और कोई आसान काम थोड़े है क्योकि सादिक ने कहा था की लन्दन मेट्रो को चार साल के लिए बंद कर देंगे क्यों की उसके खर्चे ज्यादा है
सादिक के साधारण परिवार के होने का कटाक्ष खुद सामान्य व मध्यमवर्गीय अंग्रेजो को भी खटक गया अब तक तो केवल प्रवासी ही एकजुट थे लेकिन अब मध्यमवर्गीय अंग्रेज भी साथ हो लिए, अंग्रेजो के साथ आने का एक महत्त्व पूर्ण कारन यह भी था की डैमेज कंट्रोल वो यह की मुसलमान की उग्रता से डर और उसे कंट्रोल करना और रिकार्डतोड मतों से सादिक मेयर चुन लिए जाते हैं। यह कहना की सादिक केवल सत्रह हजार मुसलमानो के वोट से जीते तो बेमानी होगा।
इसमें वही फैक्टर था जिसेकि प्रवासियों के वोट आपने तरफ ले जाना जो की कैमरन ने मोदी साहब को बुला के प्रयोग किया था और अंग्रेज ऐसे प्रयोग करते रहते है प्रवगउर सादिक के पहले एक भारतीय महिला भी लन्दन की मेयर रह चुकी है

इस बार सामान्य और साधारण परिवार के बंदे को आगे कर के चुनाव में बाजी मार लेना मोदी के लहर को दर्शाता है आने वाले दिनों में सामान्य परिवार के लोग ही सत्ता शिर्ष पदों पर बैठे मिलेंगे पुरी दुनिया में,
kanamandir
वैसे सादिक के मेयर बन्ने से पश्चिमी दुनिया के देशो में काफी हलचल है लेकिन सादिक चुनाव जितने के बाद सीधे पहले लन्दन के स्वामी नारायण मंदिर जाते है जिससे दुनिया भर के स्वधर्मी लोग उनसे नाराज है
और एक सवाल यह हो सकता है तो अमेरिका मे ऐसा क्यों नहीं वो इस लिए अमेरिकी लोगों शुद्ध व्यापारी टाइप के होते हैं चुनाव में जनता के मूड बस दादागीरी जैसे होता है माने दो शर्तें मुख्य होती है दुनिया के दूसरे देशों से युद्ध लड़ेगे या दो पड़ोसी देशों को लडवाएंगे ताकी हथियारों को बेचा जा सके, मुफ्त का तेल कहां से ला सकते है ये दोनों वादा ही प्रमुख होता मने इन्ही पे अर्थव्यवस्था निरभर होती है
रही बात फिल्म
लंदन हैज फालेन
की तो उसमें एक पाकिस्तानी आतंकवादी परिवार लंदन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री की मैय्यत मे आये नाटो देश के प्रमुखों को मार डालने पर आधारित है लंदन पुलिस प्रशासन में हर जगह पाकिस्तानी लोग भरे पड़े रहते हैं और पुरे लन्दन में बम विस्फोट कर सभी प्रमुख जगहों को उड़ा दिया जाता है जिसमें केवल अमेरिकी राष्ट्रपति को बचा लिया जाता है मुझे बहुत अच्छी तो नहीं लगी लेकिन हां
एक खास बात फिल्म में इटली के प्रधानमंत्री के इज्जत की धनिया बो दिया गया है
फिल्म के मशहूर डॉयलाग मे है
किसी से बदला ऐसा लो कि उधर कोई बदला लेने वाला ही न रह जाए।

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
May 12, 2016

जय श्री राम प्रवीणजी आपके लेख से बहुत जानकारिय मिली ये अच्छा ट्रेंड है की अब लोग धारण लोगो को ऊंचे पद पर चुन रहे सादिक ला मेयर चुनना ब्रिटेन में आयी लोगो के बदलाव की दश दर्शाता है उम्मीद है ये ट्रेंड पुरे विश्व में रहेगा भारत में गांधी यादव बदल,करूणानिधि संस्कृति कब ख़तम होगी देखना है

avdhut के द्वारा
May 13, 2016

प्रवीण साहब पता नहीं आप लोग किस नजरिये से देखते है यह ठीक है की साधारण परिवार के लोग राजनीती में ऊपर आरहे है लेकिन पाकिस्तान और अन्य मध्य एशियाई देशो में सादिक के मेयर बनने ख़ुशी कुछ इस तरह की है की जैसे ब्रिटेन पर कब्ज़ा ही कर लिया हो और मंदिर जाना तो दिखावा भर है भारतीय हिन्दू प्रवासियों को बदनाम करने जैसे लगता है की मेयर बनाने में हिन्दुओं का हाथ है ताकि बाकि ब्रिटिश नागरिक नाराज हो जाये हिन्दुओं से . 

pravin kumar के द्वारा
May 16, 2016

अवधूत जी लेख पर ध्यान देने के लिए और धन्यवाद कौन किस लिए कहाँ गया उसका उद्देश्य क्या है हमे कोई धारणा नहीं बननी चाहिए,

pravin kumar के द्वारा
May 16, 2016

रमेश जी नमस्कार धन्यवाद आपने सही व्यक्त किया आने वाले दिन ऐसे ही होंगे राजनीती में


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