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जरा हट के निकट सरल सच के

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फटे कुर्ते वाला सांसद

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देश को आजादी मिले अभी कुछ ही समय हुआ था कि भारत को एक अप्रत्याशित युद्ध को झेलना पड़ा था इन सब से उठकर देश की जनता राष्ट्र निर्माण में लग गयी।
तभी उन दिनों कानपुर में हंगामा मच चूका था सब ओर यही जनता में चर्चा होती रहती थी की बाप बेटे दोनों एक साथ पढ़ रहे है हालाँकि दोनों पिता पुत्र एक कवि के रूप मे ख्याति पा चुके थे । तब यह बहुत बड़ी बात थी और इस घटना ने लोगो में अपने आप पढाई के प्रति जागरूकता जगा दिया, क्योकि एक माध्यम वर्गीय गरीब परिवार में शिक्षा हेतु इतनी ललक थी यह देख लोग प्रेरित हुए।
लेकिन श्याम प्रसाद और दीनदयाल जी को पता नहीं उस कवि पिता के कवि पुत्र, पढाकू युवा लड़के में क्या दीखता था उसे अपने साथ राष्ट्र सेवा के लिए साथ ले लिया, कि हर काम, कार्यवाही में इस युवा से सलाह जरूर लिया जाने लगा और अमल भी। साथ ही पार्टी का मंच हो या कोई जनसभा जब यह लड़का बोलने उठता तो तो लोग कृष्ण की मुरली के तान की धुन में जैसे खो जाते वैसे ही लड़के के भाषणो से मुग्ध हो जाते, लोग दूर दूर से सुनने को आते एक खास बात की इस नवयुवक को लिखा हुआ पढ़ कर भाषण देने विचार रखने की आदत नहीं थी इससे लोग बहुत ही प्रभावित थे

दीनदयाल जी ने युवा लड़के की प्रतिभा से प्रभावित हो समस्त राष्ट्र की जनता तक आवाज पहुँचाने के लिए युवक को 1955 के आम चुनावो में पार्टी से लोकसभा का टिकट देदिया जबकि आयु अभी तीस वर्ष ही थी क्योकि इस युवा ने कश्मीर में भी जनजागरण में बहुत साथ सहयोग दिया था हालाँकि यह निर्णय गलत साबित हुआ और यह युवा चुनाव हार गया, किन्तु वर्ष 1957 के उपचुनावो में यह युवा तीन जगहों से चुनाव लड़ा जिसमे की लखनऊ से तीसरे स्थान पे रहते हुए हर गए, जबकि मथुरा में जमानत जब्त हो गयी किंतु बलरामपुर रियासत से मित्र प्रताप नारायण तिवारी के प्रयासों के कारण जीत कर लोकसभा में पहुंचे।
लोकसभा में पहुँचने के पश्चात् युवक ने कश्मीर मुद्दे अपने धारदार विचार रखा और संसद ने उन्हें ध्यान से सुना माना भी की गलत हुआ है। युवक ने कहा कि ‘कश्मीर का मामला ‘संयुक्त राष्ट्र ‘ में नहीं भेजा जाना चाहिए था, वहाँ से कोई समाधान नहीं प्राप्त होने वाला है. एक ऐतिहासिक भूल थी। भारत आक्रमणकर्ता को अपनी ज़मीन से हटा देना चाहिए था और इसके लिए आवश्यक सैनिक कार्रवाई करना चाहिए था ।
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इस भाषण के बाद पुरे देश भर में इस युवक नाम अटल बिहारी बाजपेई लोग जानने लगे. तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू जी ने लोकसभा में अटल जी से प्रभावित होते हुए की कहा की ये युवा एक दिन देश का प्रधानमंत्री जरूर बनेगा।
संसद में पहुचने के बाद भी अटल जी की गरीबी और विपन्नता ने साथ नहीं छोड़ा था अभी तक अपने हाथ से धुले हुए फटे कुर्ते धोती पहन के संसद जाते रहे किन्तु किसी से कुछ माँगा नहीं, ना ही किसी की सहायता स्वीकार किया और देश सेवा में लगे रहे किन्तु जब सांसद के तौर पर जब पहली बार वेतन मिला तब उन्होंने पहले वेतन से अपने मित्र और स्वयं के लिए पहले वेतन की मिली राशि से ही नया कुर्ता और धोती ख़रीदा।
एक प्रख्यात कवि,कुशल राजनेता, स्वतंत्रता सेनानी, सफल नेतृत्वकर्ता प्रधानमंत्री ऐसे भारतरत्न महापुरुष को अजात शत्रु को जन्मदिवस की शुभकामनाये नमन।

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